प्रमुख महासागरों की धाराएँ -{ Important Current of ocean } In Hindi




(1) प्रशान्त महासागर की धाराएँ -

 प्रशान्त महासागर विश्व का सबसे गहरा और बड़ा महासागर है । इसलिए स्वाभाविक है कि यहाँ धाराओं की संख्या भी सबसे अधिक होगी। इस महासागर में बहने वाली प्रमुख धाराएँ हैं -

अ) क्यूरोसिओ धारा - यह धारा ताइवान तथा जापान के तट के साथ बहती है । बाद में उत्तरी अमेरीका के पश्चिमी तट पर पहुँचने के बाद यह आलाक्सा धारा तथा कैलिफोर्निया धारा के रूप में बँट जाती है । किरोसिओ धारा गर्म पानी की धारा है ।

ब) यावोसिओ नाम की ठण्डी धारा प्रशान्त महासागर के उत्तर में बहती है ।

 स) इसी महासागर में पेरु नामक ठण्डे पानी की धारा भी प्रवाहित होती है ।

(2) अटलांटिक महासागर की धाराएँ -

 प्रशान्त महासागर की तरह ही यहाँ भी उत्तर और दक्षिण गोलार्द्ध में पूर्व से पश्चिम की ओर भूमध्य रेखीय धाराएँ तथा पश्चिम से पूर्व की ओर विरूद्ध भूमध्य रेखीय धाराएँ बहती हैं ।

 अ) विरूद्ध भूमध्य रेखीय धारा को पश्चिम अफ्रीका के तट पर गिनी धारा कहते हैं ।

ब) फ्लोरिडा धारा - संयुक्त राज्य अमेरीका के दक्षिण-पूर्वी तट पर फ्लोरिडा अंतरीप से हटेरस अंतरीप की ओर बहने वाली धारा फ्लोरिडा धारा कहलाती है ।

स) गल्फ स्ट्रीम - फ्लोरिडा धारा ही जब हटेरास द्वीप से आगे बहती है, तो न्यू फाउलैण्ड के पास स्थित ग्रैन्ट बैंक तक इसे ही गल्फ स्ट्रीम कहते हैं । यह गर्म पानी की धारा है ।

द) उत्तरी अटलांटिक धारा - यही गल्फ स्ट्रीम ग्रेन्ट बैंक से आगे पछुआ हवाओं के प्रभाव में आकर पूर्व की ओर मुड़ जाती है । यहाँ से यह अटलांटिक के आरपार उत्तरी
 अटलांटिक धारा के नाम से जानी जाती है ।
 अटलांटिक महासागर में बहने वाली अन्य प्रमुख धाराओं के नाम हैं - लेब्रोडोर धारा, ग्रीनलैंड धारा, ब्राज़ील धारा, बैंग्वेला धारा तथा फॉकलैंड धारा । इनमें से ग्रीनलैंड तथा लेब्रोडोर धारा चूँकि आर्कटिका महासागर से चलती है, इसलिए ठण्डी होती हैं । ये दोनों धाराएँ न्यू फाउंलैंड के पास गल्फ स्टीम नाम की गर्म जल धारा से मिल जाती हैं । इसके

 कारण यहाँ बारहों महीने कुहरा छाया रहता है । इसी कारण यह क्षेत्र मछली पकड़ने के लिए संसार का सबसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है ।
 बेंग्वेला तथा फाकलैंड, ये दोनों ही धाराएँ ठण्डे पानी की धाराएँ हैं ।

(3) हिन्द महासागर की धाराएँ -

हिन्द महासागर की धाराओं की प्रवृत्ति प्रशान्त एवं अटलांकि महासागरों से अलग है । इसके दो कारण हैं - (1) पहला, हिन्द महासागर के उत्तर में स्थल भूमि का अधिक होना, जिसके कारण धाराओं की प्रवृत्ति बदल जाती है तथा (2) दूसरा, मानसूनी हवा का प्रभाव, जिससे धाराओं की दिशा परिवर्तित हो जाती है । इसी कारण हिन्द महासागर के उत्तरी क्षेत्र में ग्रीष्म एवं शीत ऋतु में धाराओं की दिशा भिन्न-भिन्न होती है ।
 हिन्द महासागर में बहने वाली मुख्य धाराएँ हैं - मोजाम्बिक धारा (गर्म धारा, अगुलहास धारा (ठण्डी धारा), पूवी आस्ट्रलियाई धारा (गर्म धारा) तथा दक्षिण विषुवत रेखीय धारा (गर्म धारा)।